चार बार रची गई थी नेहरू के कत्ल की साजिश….!

यूं तो नेहरू की मौत 27 मई 1964 को हुई थी, लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि इससे पहले भी चार बार नेहरू के कत्ल की साजिश हुई थी। हर बार वो कभी अपनी तो कभी सिक्योरिटी वालों की तत्परता से बच गए थे। ये वो दौर था जब नेहरू की सिक्योरिटी इतनी नहीं हुआ करती थी और वो अक्सर खुली कार से सफर किया करते थे। ऐसे में हमला करना बेहद आसान था।

 

नेहरू पर पहली बार ये कोशिश बंटवारे से नाराज किसी शख्स ने 1947 में ही की थी, जब नेहरू नॉर्थ वेस्ट फ्रंटीयर के दौरे पर थे। इसका उल्लेख नेहरू के पर्सनल असिस्टेंट रहे एम ओ मथाई ने अपनी बुक ‘रिमिन्सेसेज ऑफ नेहरू एज’ में किया है, जिस पर बाद में प्रतिबंध लगा दिया गया था। नेहरू की सिक्योरिटी में लगे लोगों ने नाराज व्यक्ति को फौरन हिरासत में ले लिया था। बंटेवारे के फैसले और बंटवारे के दौरान हुई काफी परेशानी के चलते वो नेहरू से नाराज बताया गया था। ये खबर ना किसी अखबार में छपी और ना किसी रेडियो पर चली। ज्यादातर लोगों को तो पता ही तब चला जब मथाई की किताब में इसका उल्लेख किया गया, उस वक्त ये कहकर इस खबर को टाल दिया गया था कि वो व्यक्ति नेहरू को एक जोरदार थप्पड़ लगाना चाहता था।

नेहरू पर दूसरा जानलेवा हमला नागपुर में मार्च 1955 में हुआ। नेहरु उस दिन एयरपोर्ट से महाराष्ट्र के सीएम आर एस शुक्ला के साथ खुली कार में उनके घर जा रहे थे। दोनों तरफ सैकड़ों लोगों की भीड़ नेहरू के स्वागत में खड़ी थी कि अचानक एक रिक्शे वाले ने अपना रिक्शा नेहरू के काफिले में ठीक नेहरू की कार के आगे फंसा दिया। नेहरू के ड्राइवर को कार रोकनी पड़ी। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता रिक्शे वाले बाबू राम लक्ष्मण ने अचानक 6 इंच लम्बा चाकू  निकाला और नेहरू की तरफ झपटा। वो तो ऐन मौके पर नेहरू को खतरे की आशंका हुई और उन्होंने खुद को पीछे कर लिया। तब तक पुलिस वालों ने उसे अपनी गिरफ्त में ले लिया। बाद में पूछताछ में पता चला कि रिक्शे वाला काफी गरीब था और वो काफी परेशानियों से जूझ रहा था। इस हमले के जरिए वो अपनी निजी परेशानियों की तरफ सबका ध्यान खींचना चाहता था। बाद में जांच के लिए उसे मेंटल हॉस्पिटल भेज दिया गया।

 

तीसरे हमले की साजिश भी अगले ही साल 1956 में महाराष्ट्र के ही मुंबई में रची गई, जब अलग महाराष्ट्र की मांग करने वाले आंदोलनकारी इस बात से नेहरू से नाराज थे कि नेहरू ने कुछ और साल इंतजार करने को कह दिया। पुलिस ने कहा नेहरू पर बम फेंकने की साजिश थी, नेहरू की सभा में हुडदंग हुआ। चार अलग अलग झडपों में सैकड़ों लोग गिरफ्तार हुए। पुलिस मुश्किल से नेहरू को निकाल ले जा पाई। नेहरू पर चौथा जानलेवा हमला 1961 में दिल्ली में हुआ। पुरानी दिल्ली में एक कार्यक्रम से लौटते हुए एक जगह बम फटने से कई लोग घायल हो गए, नेहरू कुछ सेकंड्स पहले ही वहां से गुजरे थे। जबकि नेहरू का पहले से तय रास्ता कुछ देर पहले ही सिक्योरिटी कारणों से बदला गया था। ये थे कुल चार ऐसे हमले जो माने जाते हैं कि नेहरू की जान लेने के लिए हुए थे, हालांकि चीन से हार के बाद कांग्रेस अधिवेशन में कांग्रेसियों ने ही नेहरू के साथ बदतमीजी करने की कोशिश की थी। कांग्रेसी नेहरू से काफी गुस्सा थे, उनको बड़ी मुश्किल से उनके साथी वहां से ले गए थे। कहा जाता है 1962 में चीन की हार के बाद चारों तरफ उनकी जो बदनामी हुई थी, उसी से वो सदमे में आ गए थे, बीमार पड़ गए थे और 27 मई 1964 को उनकी मौत हो गई।

विष्णु शर्मा

Twitter.com/VishuITV

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s